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39+ Unique Hindi Poem For Class 5

We are sharing easy-to-learn Best Hindi Poem For Class 5 students. These articles will help children to learn their school syllabus of the Hindi Language.

Today we are sharing poetry in easy-to-learn language for class 5. In primary classes, children were taught poetry or stories for emotional, analytical, and mental development through the curriculum. You will be surprised to know that these poems and stories help children in their mental development. Poems, and stories improve reading, writing, speaking, and comprehension skills in children.

Hindi Poem For Class 5

Hindi Poem For Class 5

सीमा प्रहरी

एक सैनिक के दिल का राज़, थी अनसुनी सी उसकी आवाज,
चाहता था वो आज सुनाना, दिल की बातों को बतलाना ।।
जिगर हमारा फौलाद सा होता, लेकिन दिल जज़्बात ना खोता ।
दुश्मन को हम धूल चटायें, लेकिन अपनो को भूल ना पायें ।।
बहना की थी बस एक ही आस, राखी के दिन हो भाई पास ।
आज भी आँखे भर आती हैं, जंग के दिनों जो राखी आती है ।।
माँ की थी बस एक ही आस, घर लौटूं जल्दी उसके पास ।
खीर हाथों से मुझे खिलाये, प्यार से मेरा सिर सहलाये ।
आज भी आँखे भर जाती हैं, माँ की जब चिट्ठी आती है ।।
पापा की थी बस एक ही आस, बेटा हो मेरे देश का नाज़ ।
रगों में जिसके देश की भक्ति, बाजुओं में हो फौलाद सी शक्ति ।
उनका सपना मेरा सपना, सारा देश परिवार अपना ।
ये था सैनिक के दिल का राज़, वो अनसुनी दबी आवाज़ ।
जिसे सुनाया कविता में आज, देश सैनिक” के सिर का ताज ।।

लहु के रंग

गोलियों से जिस्म लहूलुहान है,
जीवन कुछ पलों का मेहमान है ।

हर पल भंवर सा घूम रहा,
गले में पहनी माँ की निशानी चूम रहा ।।

कलाई पर पिछले साल की राखी है,
बहन की डोली की आस बाकी है ।।

बुढ़े पिता की लाठी ना बन पाऊंगा,
अब उन्हें लड़खड़ाते ही छोड़ जाऊंगा ।।

हमसफर को बीच सफर छोड़ चला,
सात फेरों में ली कसम तोड़ चला ।।

लगा जैसे बच्चे पापा को बुला रहे,
उन्हें क्या पता, पापा सदा के लिए जा रहे ।।

मेरी हालत देख यमराज को भी है गिला, देशों की थी दुश्मनी,
सिला जवानों को क्यों मिला ?

जाने कितने साथी घायल, कितने परलोक सिधारे ।
वे सब भी तो होंगे, माँ की आंखों के तारे ।।

ना मैं जानू नाम तुम्हारा, ना तुमको मेरी पहचान ।
फिर कारण क्या जो लेते, हम इक दूजे की जान ?

Hindi Poem For Class 5 On Father

पापा का प्यार

बच्चे खेल के वापस आये, पीछे से ही गले लगाये ।
रोम–रोम में खुशियाँ जागी, थकन थकावट एकदम भागी ।।

अपने गंदे वस्त्र देखकर, पापा मुझको कभी ना डांटे ।
सब सुख देते मुझको पापा, अपने हिस्से दुख ही बांटे ।।

बचपन बीता आई जवानी, उसकी थी कुछ अजब कहानी ।
जब भी नैया गई मझदार, पापा ने ढूढ़ी पतवार ।।

लोग बदल जाते हैं अक्सर, मौसम ज्यों बदलता पापा ।
जैसा प्यार किया बचपन में, आज भी वैसा करते पापा ।।

बिन कुछ पूछे बिन कुछ बोले, दिल की बात समझते पापा ।
मन की बातें जो ना समझी, वो भी समझ लेते थे पापा ।।

दिन रात ही मेहनत रोज वो करते, लौटते घर मुस्काकर पापा थक जाते थे फिर भी हमको,
समय दिया करते थे पापा ।।

हर रोज नई फरमाईश करती, फिर भी पूरी करते पापा ।
हम बच्चों के हर सपने को, पूरा किया करते थे पापा ।।

आज मैं जो कुछ बन पाई हूँ, आप ही की है बदौलत पापा ।
आप की मेहनत रंग लाई है, तुम बिन कुछ, नहीं मैं पापा ।।

जानू दिल पर पत्थर रख कर, विदा मुझे किये थे पापा ।
होठों पर मुस्कान सजी थी, दिल ही दिल रोये थे पापा ।।

घर बदला है मेरा लेकिन, दिल में आज भी रहते पापा ।
जैसा प्यार किया बचपन में, आज भी तुमसे करती हूँ पापा ।।

बुढ़ापे की लाठी तेरी बनकर, तीरथ तुम्हें करवाऊँ पापा ।
बेटी होने का मैं अपना, हर एक फर्ज निभाऊ पापा ।।

जान से मेरी प्यारे मुझको, तेरे प्यार पे इतराती पापा ।
जैसा प्यार किया बचपन में, आज भी वैसा करती हूँ पापा ।।

आज वो पापा कहाँ गये, सोच कलेजे हूंक उठी ।
कोयल तो अम्बुआ पे रोई, हम समझे कूक उठी ।।

Hindi Poem For Class 5 Recitation

आरिवर क्यों ?

बचपन में जीवन की, छोटी–छोटी खुशियां थी ।
दो चवन्नियां माँ से, पिता से मिलती अठन्नी थी ।।

मुट्ठी भर चने से, जेब अपनी भर लेता ।
रखता कुछ खुद के लिए, कुछ दोस्तों को देता ।।

अल्हड़ शरारत की, मौजों में मैं रहता ।
खुद को अपने घर का, राजकुमार मैं कहता ।।

ना कोई परेशानी थी, ना शिकन ना शिकवे ।
मौज करते गलियों में, फिरते थे बेफिकरे ।।

जैसे–जैसे बचपन खोया, कंधो को ज़रा भारी पाया ।
गया जो दर्पण के पास, शिकन का हुआ अहसास ।।

जेब में पैसे भरे हुए थे, फिर भी थी कुछ और की भूख ।
जितना भी पानी डालूं मैं, फिर फिर पत्ते जाते सूख ।।

क्यों चाहतों को इतना बढ़ाया,
खुद को इनसे छोटा पाया रखता जो शुकराने पास, खुद होती पूरी हर आस ।।

Hindi Poem For Class 5 On Nature

बरखा आई

रिमझिम रिमझिम बरखा आई।
टिप टिप टिप बूंदे बरसाई ॥

कल कल नदियाँ गीत सुनायें।
झर झर झरने झाग बनायें।।

माटी सुगन्ध से धरती महकी ।
बादल में देखो बिजली कड़की।।

मोर बाग में ले अंगडाई।
में आओ में आओ की रट है लगाई ।

गुड्डू कागज़ की नाव तैराये।
नाच नाच कर ताली बजाना।।

मुन्नु आये चुन्नु आये।
कूद कूद कर खूब नहाए।।

बरखा में देखो के खेत ।
हरे कालीन से दमक रहे हैं।।

पेड़ पौधे भी नहा धोकर।
देखो कैसे चमक रहे हैं।।

गर्मी

मई जून का महिना आया।
स्कूल की छुट्टियाँ साथ में लाया।।

भूनेगी गर्मी मक्की जैसे।
पॉपकॉर्न बन जायेंगे।

लेकिन ढंडे मीठे आमों को।
खाने मौज उड़ायेंगे ।
तरबूज, खरबूजे की तरावट पाकर होम वर्क तो करना होगा ।

मेहनत कर बुद्धिमान बन ।
जीवन में आगे बढ़ना होगा||

घूप में मत जाना भैया।
गर्मी से लू लग जायेगी।
बुखार चढ़ा तो सारी मस्ती धरी की धरी, रह जाएगी।

Hindi Poem For Class 5 On Mother

माँ का साथ

भीड़ में कहीं मैं खो ना जाऊँ,
थाम लो मेरा हाथ तुम माँ ।
डर लगता है खो जाने से,
दूर कहीं तुमसे जाने से ।

रहना चाहूं तुम संग लीन,
जैसे जल संग रहे हैं मीन ।
माना तुझ बीन रह नहीं पाया,
बेटा हूँ सो कह नहीं पाया ।

लेकिन सहम जाता हूँ माँ,
जो दूर खुदको पाता हूँ माँ।
दुनिया क्यों नहीं तेरे जैसे,
मुझे अपनाती जैसा हूं वैसे ।

क्यों मुझको ये मोड़ना चाहे?
जो ना मुडे ये तोड़ना चाहे ।
तुम ऐसी तो नहीं हो माँ,
काश दुनिया तुमसी हो माँ ।

मैया मोरी याद तोरी

ओ माँ तेरी याद हमेशा, पल–पल मुझको आती है ।
जब किसी माँ बच्चे को देखू, ममता तेरी याद आती है ।।

तेरी ही कोख से, इस दुनिया में आई हूं ।
तेरे ही सीखलाई से, कदमों पर चल पाई हूं ।।

जीवन की हर मुश्किल में, संग तेरा साया पाया था ।
थक कर जब घर लौटी मैं, तूने सिर सहलाया था ।।

मेरी खातिर जाने कितनी, रातों की नींद गवाई थी ।
मेरे हर एक घाव पर, प्यार का मरहम लगाई थी ।।

तेरी चुड़ियों की मधुर खनक, कानों को अब तक याद है ।
तेरी एक–एक याद से, पल–पल मेरा आबाद है ।।

तेरी ममता ऐसी थी, जैसी सर्दी में धूप का साथ ।
प्यारी लगती थी मुझको, जैसे सावन की पहेली बरसात ।।

जी करता ऐ सब के मालिक, आज मैं तेरे घर आ जाऊं ।
छीनकर अपनी माँ को तुझसे, वापस अपने घर ले जाऊं..

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Hindi Poem For Class 5 On Mother

Hindi Poem For Class 5 For Competition

बचपन के पल चिन्ह

यादों की गलियों में, जो बचपन को देखा ।
नजर आया वो वक्त. जिसमें गम था अनदेखा ।।

खुशियां ही खुशियां, थी मेरे चारों ओर ।
गुंजता था घर में, किलकारियों का शोर ।।

न जाने कितनी कहानियां, थी पापा ने सुनाई ।
न जाने कितनी लोरियाँ माँ ने मेरी गाई ॥

यक कर जब सोना चाहा, गोद का बिछौना था साथ ।
नींद से जागी जब कभी, हाथों में था उनका हाथ ॥

बचपन चला गया है अब, माँ पापा आज मी मेरे साथ ।
दुर्बल हुए तो क्या हुआ, है सिर पर मेरे उनका हाथ ।।

Hindi Poem For Class 5 On Animals

खरगोश

खरगोश बाग में रहता है सरपट दौड़ लगाना है।।
गाजर मूली खाता है। केला उसको पता है।
लाल लाल है आंखें उसकी । खड़े कान वो रखता है ।।
छूकर देखो कोमल कोमल । रूई जैसा लगता है।।

तितली रानी

तितली रानी, तितली रानी । हर एक दिशा से आती तुम
फूल फूल से पात पात से | कौन बातें बतियाती तुम ।।
कितनी प्यारी कितनी न्यारी । सुन्दर रंगों से सजी हो तुम ।।
थिरक थिरक कर झूम झूम कर । बच्चों को खूब भगाती तुम ||

भूखी बिल्ली

बिलैया चली रसोई में । सोचा कुछ तो खाऊँगी ।
भूख के मारे पिचका पेट। जो पाऊँ, खा जाऊँगी ।।
वाह ! दूध जलेबी मक्खन है। पर उसमें तो मक्खी है।।
कैसे खाऊँ क्या करूं हाय मैं। क्या भूखी ही सो जाऊँ मैं।।

मोर

देखो सजीला सुन्दर मोर । कितना रंग बिरंगा मोर।।
पंखों को फैलाता है। सबको नाच दिखाता है।।
बोल बोल कर मेहआओ । मानो, बरखा को बुलाता है।।
बच्चों का मन थिरक थिरक कर। नाच नाच कर गाता है |

ऊंट

वो देखो वो ऊंट सजीला। बना हुआ है छैल छबीला
लम्बे पैर लम्बी गरदन ।। चलता चले जब चले कीला।
रेत पे चलता, कभी न थकता।। रेगिस्तानी जहाज़ कहलाता।
पानी संजो रखता शरीर में || कूबड़ हिलाता फिर इठलाता।।

You must have liked Hindi Poem For Class 5 on nature. Children must have proved helpful in developing affection for poetry. At the same time, it has helped in changing the mindset of the children.

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